हल्की गतिविधि और कम बैठे रहने की आदतें
शहरी वातावरण में, जहाँ अधिकांश समय यात्रा या कुर्सी पर बीतता है, वहाँ छोटे-छोटे बदलावों से शरीर को सक्रिय रखना।
पुणे, बेंगलुरु या दिल्ली जैसे शहरों में, हमारा बहुत सारा समय ट्रैफिक में या लैपटॉप स्क्रीन के सामने बीतता है। लगातार बैठे रहने (long sitting) से शरीर में जकड़न आ जाती है और हम बिना कोई शारीरिक मेहनत किए ही थकान महसूस करने लगते हैं।
यहाँ हमारा उद्देश्य किसी कठिन वर्कआउट रूटीन को अपनाना नहीं है, बल्कि उस "स्थिरता" को तोड़ना है। दिन भर में छोटी-छोटी गतिविधियाँ आपके शरीर को याद दिलाती हैं कि उसे कैसे सहज रहना है। मेट्रो स्टेशन तक थोड़ा पैदल चलना या काम के दौरान हर एक घंटे में अपनी जगह से उठना, ऐसे ही कुछ सरल उपाय हैं।
दिनचर्या में शामिल करने योग्य छोटे कदम
काम के बीच छोटे ब्रेक
यदि आप घर से काम कर रहे हैं या ऑफिस में हैं, तो फोन पर बात करते समय टहलने की आदत डालें। यह बहुत आसान है और समय की बचत भी करता है।
सीढ़ियों का प्रयोग
लिफ्ट का इंतज़ार करने के बजाय, यदि आप शारीरिक रूप से सहज हैं, तो एक या दो मंज़िल के लिए सीढ़ियाँ चढ़ना एक बेहतरीन गतिविधि है।
शाम की सैर
परिवार के साथ रात के खाने के बाद 15 मिनट की सैर। यह न केवल खाना पचाने में मदद करती है, बल्कि यह स्क्रीन-फ्री समय भी होता है।
शरीर को स्ट्रेच करना
कुर्सी पर बैठे-बैठे ही अपनी गर्दन और कंधों को हल्का स्ट्रेच करें। यह लंबे काम के दिनों में तनाव को कम करने में सहायक है।
दबाव मुक्त दृष्टिकोण
गतिविधि को एक 'टास्क' या मजबूरी न समझें। यदि किसी दिन आप बहुत थके हुए हैं, तो आराम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अपने शरीर की आवाज़ सुनें। लक्ष्य यह है कि आप अपनी सुविधा के अनुसार धीरे-धीरे हलचल बढ़ाएं, न कि खुद को थकाएं।